pramodksingh01

Saturday, March 06, 2010

Friday, July 03, 2009

Thursday, February 05, 2009

और जब जहन में आ गए कई सवाल

तो हमने कहा

के सुनो ......

कतार में रहो ,

अच्छे भले हो आदमी

आँखें खुली रखो ,

यूँ खामख्वाह के मत किसी खुमार में रहो ...............

तेरे बदन पे तिल कहाँ हैं

जानते हैं हम

अब तुम

हमारे काले कारोबार में रहो

सारे गुनाह खिल के तो गुलाब हो गए

अब

आज से

काँटों के इख्तियार में रहो

Wednesday, February 04, 2009

Tuesday, February 03, 2009